Vaibhav Laxmi

यह व्रत शीघ्र फलदायी हैं किन्तु फल न दे तो तीन माह के बाद फिर से व्रत शुरू करना चाहिये। और जब तक मनवांछित फल न मिले तब तक यह व्रत तीन-तीन महीने पर करते रहना चाहिये। तो कभी इसका फल अवश्य मिलता ही है।

व्रत विधि शुरू करने से पहले की विधि

(1) ‘श्रीयंत्र’ के सामने देखकर ‘श्रीयंत्र को प्रणाम।’ ऐसा बोलकर श्रीयंत्र को प्रणाम करें। (इस पुस्तक में ‘श्रीयंत्र’ की छवि दी हुइ है।)

(2) बाद में लक्ष्मी जी के नीचे मुताबिक आठ स्वरूप की छवियाँ को प्रणाम करें।

(1) धनलक्ष्मी एवं वैभवलक्ष्मी स्वरूप, (यह पुस्तक में पहले ही उनकी चतुरंगी छवि दी है।)
(2) श्री गजलक्ष्मी माँ
(3) श्री अधिलक्ष्मी माँ,
(4) श्री विजयालक्ष्मी माँ
(5) श्री ऐश्रवर्यलक्ष्मी माँ,
(6) श्री बीरलक्षमी माँ
(7) श्री धान्यलक्ष्मी माँ
(8) श्री संतान लक्ष्मी माँ,

(3) वाद में नीचे दिया हुआ ‘लक्ष्मी स्तवन’ का पाठ करें। गहने की पूजा करते वक्त बोलने का