श्री लक्ष्मी महिमा

श्री लक्ष्मी महिमा

श्री वैभवलक्ष्मी व्रत मंे आरती करने के बाद यह श्लोक का पठन करने से शीध्र फल मिलता है।

यत्राभ्यागवदानमान चर पक्षालनं भोजन।
सत्सेवा पितृदेववार्चन विधिः सत्यंगवां पालनम्।।

धान्या नामपि सग्रहो न कलहश्चित्ता तृरूपा प्रिया।
दृष्टा प्रहा हरि वसमि कमला तस्मिन गृहे निष्पफला।।

 

भावार्थ
जहाॅ मेहमान की आव-भगत करने में आती है………… उनको भोजन कराया जाता है, जहाॅ सज्जनों की सेवा की जाती है, जहाॅ निरन्तर भाव से भगवान की पूजा और धन्य धर्मकार्य किये जाते हैं। जहाॅ सत्य का पालन किया जाता है, जहाॅ गलत कार्य नहीं होते, जहाॅ गायों की रक्षा होती है जहाॅ दान देने के लिये धान्य का संग्रह किया जाता है, जहाॅ पत्नी संतोषी और विनयी होती है, ऐसी जगह पर मैं सदा निश्चल रहती हॅू। इनके सिवा की जगह पर कभी कभार दृष्टि डालती हॅू।